What is right to information Act 2005 | RTI क्या होता हैं ?

लोकतंत्र  में देश की जनता अपनी चुनी हुई व्यक्ति को शाशन करने का मौका प्रदान करती  है | और यह अपेक्षा करती है की सरकार पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपना काम करेगी |लेकिन अधिकांश राष्ट्रों  ने ईमानदारी और पारदर्शिता की बोटियाँ नोचने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक बड़े -बड़े कीर्तिमान बनाने में नहीं भूले |

सरकारे यह भूल जाती है की जनता ने उन्हें चुना है और जनता ही देश के असली मालिक हैं और सरकार जनता के चुने हुए नौकर |इसीलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है ,की  जो सरकार जनता ने चुना हैं ,वह क्या और कैसे काम कर रही हैं |

RTI क्या होता हैं |

देश के हर एक नागरिक किसी न किसी माध्यम से सरकार को टैक्स देती हैं |यहाँ तक की सुई से लेकर सिलाई मशीन तक |इसीलिए देश के हर  एक नागरिक को अधिकार हैं ,की उनके द्वारा दिया हुआ पैसा कब ,कहाँ  और किस प्रकार खर्च किया जा रहा हैं इसकी जानकारी हो  |

तो इसके लिए जरुरी था सूचना का अधिकार  जनता के समक्ष रखने का और जनता को सूचना पाने का अधिकार |जो की कोई कानून के द्वारा  ही हो पाता |

और इसी को लेकर 15 जून 2005 में  सूचना का अधिकार अधिनियम ,2005 (Right to Information Act ,2005) लागु किया गया |जहाँ पर केंद्रीय सरकार द्वारा हर एक काम की जानकारी की सूचना आम आदमी  द्वारा मांगे जाने पर प्रदान किया जायेगा |

 

सूचना अधिकार का अर्थ :—

इसके समक्ष निम्नलिखित बिंदु आते हैं |

  1. कार्यो, दस्तावेजों और विभिन्न रिकार्डो का निरीक्षण।
  2. दस्तावेज या रिकार्डो की प्रस्तावना। सारांश, नोट्स व प्रमाणित प्रतियाँ प्राप्त करना।
  3. सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना (हार्ड कॉपी के साथ)।
  4. प्रिंट आउट, डिस्क, फ्लाॅपी, टेप, वीडियो कैसेटो के रूप में या कोई अन्य इलेक्ट्रानिक रूप में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

सूचना का अधिकार अधिनियम् ,2005 के प्रमुख प्रावधानः

  1. सभी सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर यूनिट(PSU), किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता से चल रहीं गैर सरकारी संस्थाएं व शिक्षण संस्थान आदि विभाग इसमें शामिल हैं।परन्तु निजी संस्थाएं इस कानून के दायरे में नहीं हैं लेकिन यदि किसी कानून के तहत कोई सरकारी विभाग किसी निजी संस्था से कोई जानकारी मांगता तो उस विभाग के माध्यम से वह सूचना दी जा सकती है।
  2. प्रत्येक सरकारी विभाग में एक या एक से अधिक जनसूचना अधिकारी बनाए गए हैं, जो सूचना के अधिकार के तहत आवेदन स्वीकार करते हैं, मांगी गई सूचनाएं एकत्र करते हैं और उसे आवेदनकर्ता को उपलब्ध कराते हैं।

7.जनसूचना अधिकारी की दायित्व है कि वह 30 दिन अथवा जीवन व स्वतंत्रता के मामले में 48 घण्टे के अन्दर (कुछ मामलों में 45 दिन तक) मांगी गई सूचना उपलब्ध कराए।

  1. यदि जनसूचना अधिकारी आवेदन लेने से मना करता है, तय समय सीमा में सूचना नहीं उपलब्ध् कराता है अथवा गलत या भ्रामक जानकारी देता है तो देरी के लिए 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 25000 तक का जुर्माना उसके वेतन में से काटा जा सकता है। साथ ही उसे सूचना भी देनी होगी।
  2. लोक सूचना अधिकारी को अधिकार नहीं है कि वह आपसे सूचना मांगने का कारण नहीं पूछ सकता,लेकिन कुछ विशेष मामलों में पूछा जा सकता हैं ,लेकिन मना नहीं किया जा सकता ।

10.सूचना मांगने के लिए आवेदन फीस देनी होगी (केन्द्र सरकार ने आवेदन के साथ 10 रुपए की फीस तय की है। लेकिन कुछ राज्यों में यह अधिक है, बीपीएल कार्डधारोकों को आवेदन शुल्क में छुट प्राप्त है।

11.दस्तावेजों की प्रति लेने के लिए भी फीस देनी होगी। केन्द्र सरकार ने यह फीस 2 रुपए प्रति पृष्ठ रखी है लेकिन कुछ राज्यों में यह अधिक है, अगर सूचना तय समय सीमा में नहीं उपलब्ध कराई गई है तो सूचना मुफ्त दी जायेगी।

12.यदि कोई लोक सूचना अधिकारी यह समझता है कि मांगी गई सूचना उसके विभाग से सम्बंधित नहीं है तो यह उसका कर्तव्य है कि उस आवेदन को पांच दिन के अन्दर सम्बंधित विभाग को भेजे और आवेदक को भी सूचित करे। ऐसी स्थिति में सूचना मिलने की समय सीमा 30 की जगह 35 दिन होगी।

  1. लोक सूचना अधिकारी यदि आवेदन लेने से इंकार करता है। अथवा परेशान करता है। तो उसकी शिकायत सीधे सूचना आयोग से की जा सकती है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाओं को अस्वीकार करने, अपूर्ण, भ्रम में डालने वाली या गलत सूचना देने अथवा सूचना के लिए अधिक फीस मांगने के खिलाफ केन्द्रीय या राज्य सूचना आयोग के पास शिकायत कर सकते है।
  2. जनसूचना अधिकारी कुछ मामलों में सूचना देने से मना कर सकता है। जिन मामलों से सम्बंधित सूचना नहीं दी जा सकती उनका विवरण सूचना के अधिकार कानून की धारा 8 में दिया गया है। लेकिन यदि मांगी गई सूचना जनहित में है तो धारा 8 में मना की गई सूचना भी दी जा सकती है। जो सूचना संसद या विधानसभा को देने से मना नहीं किया जा सकता उसे किसी आम आदमी को भी देने से मना नहीं किया जा सकता।
  3. यदि लोक सूचना अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना नहीं देते है या धारा 8 का गलत इस्तेमाल करते हुए सूचना देने से मना करता है, या दी गई सूचना से सन्तुष्ट नहीं होने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर सम्बंधित जनसूचना अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारी यानि प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की जा सकती है।

16- यदि आप प्रथम अपील से भी सन्तुष्ट नहीं हैं तो दूसरी अपील 60 दिनों के भीतर केन्द्रीय या राज्य सूचना आयोग (जिससे सम्बंधित हो) के पास करनी होती है।

अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमेंट करना न भूले ,धन्यवाद् |

source :- wikipedia

 

 

 

 

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